प्यार में कभी फिसल कर देखो ।
अंधियारों कों निगल कर देखो ।
खाकर ज़ख्म संभल कर देखो ।
गोद में माँ की मचल कर देखो ।
सोच पुरानी बदल कर देखो ।
खुशियों से भर जाओगे तुम
घर से ज़रा निकल कर देखो ।
--------अनिल उपहार ----
अंधियारों कों निगल कर देखो ।
खाकर ज़ख्म संभल कर देखो ।
गोद में माँ की मचल कर देखो ।
सोच पुरानी बदल कर देखो ।
खुशियों से भर जाओगे तुम
घर से ज़रा निकल कर देखो ।
--------अनिल उपहार ----
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