दायित्वों पर चल कर देखो ।
दीपक सम तुम जल कर देखो ।
मुफलिसी में पल कर देखो ।
पर हित मित्रों गल कर देखो ।
विश्वासों में ढल कर देखो ।
फूलों से खिल जाओगे तुम ।
घर से ज़रा निकल कर देखो ।
-------अनिल उपहार -----
दीपक सम तुम जल कर देखो ।
मुफलिसी में पल कर देखो ।
पर हित मित्रों गल कर देखो ।
विश्वासों में ढल कर देखो ।
फूलों से खिल जाओगे तुम ।
घर से ज़रा निकल कर देखो ।
-------अनिल उपहार -----
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