Friday, September 4, 2015
Thursday, September 3, 2015
काव्यांजलि
हमने खाई थी कसम लौट के ना आने की ।
तेरी महफिल से सरे राह चले जाने की ।
अजीब सी थी कशिश तेरी हँसी चितवन में
मै तो मुजरिम था सजा पाई उस फ़साने की ।
---------अनिल उपहार ------काव्यांजलि
तेरी महफिल से सरे राह चले जाने की ।
अजीब सी थी कशिश तेरी हँसी चितवन में
मै तो मुजरिम था सजा पाई उस फ़साने की ।
---------अनिल उपहार ------काव्यांजलि
काव्यांजलि
हमने खाई थी कसम लौट के ना आने की ।
तेरी महफिल से सरे राह चले जाने की ।
अजीब सी थी कशिश तेरी हँसी चितवन में
मै तो मुजरिम था सजा पाई उस फ़साने की ।
---------अनिल उपहार ------काव्यांजलि
तेरी महफिल से सरे राह चले जाने की ।
अजीब सी थी कशिश तेरी हँसी चितवन में
मै तो मुजरिम था सजा पाई उस फ़साने की ।
---------अनिल उपहार ------काव्यांजलि
काव्यांजलि
हमने खाई थी कसम लौट के ना आने की ।
तेरी महफिल से सरे राह चले जाने की ।
अजीब सी थी कशिश तेरी हँसी चितवन में
मै तो मुजरिम था सजा पाई उस फ़साने की ।
---------अनिल उपहार ------काव्यांजलि
तेरी महफिल से सरे राह चले जाने की ।
अजीब सी थी कशिश तेरी हँसी चितवन में
मै तो मुजरिम था सजा पाई उस फ़साने की ।
---------अनिल उपहार ------काव्यांजलि