Thursday, September 3, 2015

काव्यांजलि

हमने खाई थी कसम लौट के ना आने की ।



तेरी महफिल से सरे राह चले जाने की ।



अजीब सी थी कशिश तेरी हँसी चितवन में 



मै तो मुजरिम था सजा पाई उस फ़साने की ।



---------अनिल उपहार ------काव्यांजलि

काव्यांजलि

हमने खाई थी कसम लौट के ना आने की ।



तेरी महफिल से सरे राह चले जाने की ।



अजीब सी थी कशिश तेरी हँसी चितवन में 



मै तो मुजरिम था सजा पाई उस फ़साने की ।



---------अनिल उपहार ------काव्यांजलि

काव्यांजलि

हमने खाई थी कसम लौट के ना आने की ।



तेरी महफिल से सरे राह चले जाने की ।



अजीब सी थी कशिश तेरी हँसी चितवन में 



मै तो मुजरिम था सजा पाई उस फ़साने की ।



---------अनिल उपहार ------काव्यांजलि