मैंने हर गीत ग़ज़ल में तुम्ही को गाया है ।
रहूँ कहीं भी मगर साथ तेरा साया है ।
बेवफा कह के बुलाऊँ तो बुलाऊँ कैसे
प्यार करने का हुनर भी तो तुमसे पाया है
।।।।।।।।।। ( 2 )
मेरा मकसद है यही तू सदा ही शाद रहे ।
उसकी रहमत से दिल की बस्ती भी आबाद रहे
मिलन के साथ जुदाई का दौर आता है
मैं तुझमे और तू मुझमे ही ज़िंदाबाद रहे ।
(3)
कभी उदासियों में आँख नम नही करना ।
ज़माना कुछ भी कहे कोई गम नही करना
साथ हमने जो गुज़ारे है उन पलों की कसम
रहें कहीं भी मगर प्यार कम नहीं करना ।
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