दर्द लिख कर उम्र भर की दासता ढोते रहे ।
इक अदद मुस्कान को पहचान वो खोते रहे ।
अपने हिस्से की ख़ुशी भी रास न आई जिन्हें
शब्द के फनकार कवि भी प्यार कर रोते रहे ।
-------अनिल उपहार -----
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