आज फिर से दुआओ में असर आया है ।
चाँद फिरसे मेरे आँगन में उतर आया है ।
पढ़ तो लेता मैं उसे शोख़ निगाहों से मगर
अक्स जैसे कोई आँखों में उभर आया है ।
अनिल उपहार
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