सफर हम तय भी कर लेते जो होता साथ तू मेरे । मिटा देते हम हर एक फासला जो होता साथ तू मेरे । ज़माने की रवायत को भी पीछे छोड़ आते हम कदम तो खुद बढे जाते जो होता साथ तू मेरे । अनिल उपहार
भारत माता सिसक रही है सरहद की लाचारी पर ।
और विवश है ज़र्रा ज़र्रा दोगली तैयारी पर ।
खून बहाया बेटो ने बलिदान व्यर्थ नही जायेगा ।
सिर्फ राख छाई है थोड़ी धधकती चिंगारी पर ।
अनिल उपहार