Saturday, November 5, 2016

सफर मुक्तक

सफर हम तय भी कर लेते जो होता साथ तू मेरे ।
मिटा देते हम हर एक फासला जो होता साथ तू मेरे ।
ज़माने की रवायत को भी पीछे छोड़ आते हम
कदम तो खुद बढे जाते जो होता साथ तू मेरे ।
अनिल उपहार

Friday, November 4, 2016

मुक्तक

भारत माता सिसक रही है सरहद की लाचारी पर ।

और विवश है ज़र्रा ज़र्रा दोगली तैयारी पर ।

खून बहाया बेटो ने बलिदान व्यर्थ नही जायेगा ।

सिर्फ राख छाई है थोड़ी धधकती चिंगारी पर ।

अनिल उपहार