Wednesday, February 22, 2017

मुक्तक (पाती बसंत के नाम )

भ्रमर करने लगे गुंजन फ़िज़ा भी मुस्कुराती है ।

अली ने संग कलियों के लिखी बासंती पाती है ।

कुसुमित द्वार पर सज कर किलोले कर रहे पल्लव

चली पुरवाई फागुन की मिलन के  गीत गाती है ।

अनिल जैन उपहार

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