भ्रमर करने लगे गुंजन फ़िज़ा भी मुस्कुराती है ।
अली ने संग कलियों के लिखी बासंती पाती है ।
कुसुमित द्वार पर सज कर किलोले कर रहे पल्लव
चली पुरवाई फागुन की मिलन के गीत गाती है ।
अनिल जैन उपहार
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