Thursday, November 30, 2017

मुक्तक(प्रणय गीत)

इक प्रणय गीत है एक प्रणय छंद है ।

तन से तन को मिली जो मधुर गंध है ।

देखा बासंती मन तो नयन कह उठे

प्यास का तृप्ति से आज अनुबंध है ।

अनिल जैन उपहार

Wednesday, November 29, 2017

मुक्तक (सबक)

माना कि ज़िंदगी की दौड़ में बढ़ गए हो तुम ।
और शोहरत की ऊंचाई चढ़ गए हो तुम ।
माँ बाप की खिदमत का सबक सीखा नही तुमने
कैसे मान लें कि सारे सबक पढ़ गए हो तुम ।

अनिल उपहार

Tuesday, November 28, 2017

कविता

संवेदना के आईने में
नही उभरता
अब कोई अक्स
अपनेपन का ,

शब्दों के रुमाल
झाड़ने लगते है
स्वार्थ की महीन
धूल ।

गरीब होती
वैचारिक सम्पदा
अस्तित्व खोते
संस्कार युक्त वैभव ने

लिख दिया है लेखा जोखा
समय के भाल पर ।

इतिहास लिखेगा
वृतांत
कर्मो की स्याही से ,
तब नही होगा सामर्थ्य
बांचने का ,
पथराई आंखों में ।।।।

#अनिल जैन उपहार
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मुक्तक(चूम लेती है )

मेरी यादों की कश्ती में वो दुनियाँ घूम लेता है ।

गुज़ारे साथ जो लम्हे उन्ही पर झूम लेता है ।

छुआ जिस दिन उसे मैंने तो सुध बुध भूल बैठा वो

आईना सामने रख कर के खुद को चूम लेता है ।

#@कॉपीराइट अनिल उपहार

Friday, November 17, 2017

मुक्तक

किसी की याद में शामो सहर,
              तपना लिखा होगा |

उनींदी आँख को उसने हँसी,
             सपना लिखा होगा |

मेरा होकर भी जो मेरा ,कभी
                भी हो नही पाया |

मुकद्दर में नही शायद मिलन,
             अपना लिखा होगा |

अनिल उपहार

Thursday, November 16, 2017

कविता(लिख-जोखा)

संवेदना के आईने में
नही उभरता
अब कोई अक्स
अपनेपन का ,

शब्दों के रुमाल
झाड़ने लगते है
स्वार्थ की महीन
धूल ।

गरीब होती
वैचारिक सम्पदा
अस्तित्व खोते
संस्कार युक्त वैभव ने

लिख दिया है लेखा जोखा
समय के भाल पर ।

इतिहास लिखेगा
वृतांत
कर्मो की स्याही से ,
तब नही होगा सामर्थ्य
बांचने का ,
पथराई आंखों में ।।।।

#अनिल जैन उपहार
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