Tuesday, September 7, 2021

मुक्तक(तुमसे ही पाया है ।)

ज़हन में हर घड़ी मेरे ,तेरी यादों का साया है ।
मगर तू है नही मेरा,नहीं लगता पराया है ।
किसी की आंख का आँसू चुरा पलकों पे रख लेना,
मुहोब्बत का यही लहज़ा तो मैने तुमसे पाया है ।

डॉ अनिल जैन उपहार#कॉपीराइट

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