काव्यांजलि
Monday, August 29, 2022
मुक्तक ।।।। श्रृंगार
--------------------
कहूँ कैसे की कोई कर गया पावन मेरे मन कों ।
छुआ महंदी भरे हाथों से चन्दन कर दिया तन कों ।
नहीं अब जी कहीं लगता वो लम्हा याद आता है ,
किसी के प्रेम की बारिश भिगो कर जब गयी मन कों ।
----- डॉ अनिल जैन उपहार
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
View mobile version
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment