काव्यांजलि
Saturday, December 24, 2022
मुक्तक (गम का बादल)
#saturday -post 42
तेरी चाहत का हंसी लम्हा याद आता है।
मन के अहसासो से वो और निखर जाता है।
तुझ से मिलना भी जरूरी है पर ये कैसे कहूं,
गम का बादल मेरी आंखों में उतर जाता है ।।।।।
डा अनिल जैन उपहार
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