काव्यांजलि
Sunday, December 25, 2022
मुक्तक(खता)
प्यार का सिलसिला यूंही चलता रहा।
ख्वाब आंखों में दिन रात पलता रहा।
इक ज़रासी खता क्या हुई इस कदर
वो भी जलता रहा,मैं भी जलता रहा।
डा अनिल जैन उपहार
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