Friday, February 24, 2023

फागुन की मस्ती(मुक्तक)

मौसम पर छाने लगी अब फागुन की गंध।

कलियों ने भी लाज के तोड़ दिए तटबंध ।

 फागुन बन आना प्रिये ओ मेरे मनमीत।

मादकता लिखने लगी अधरों पर नवगीत।

-------अनिल उपहार----

Monday, February 20, 2023

कविता (शिल्पी)

ओ शिल्पी 
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कोई नन्हा सा किरदार था 
वो रिश्तों के रंगमंच का ।
जीवन के सुख दुःख 
देखे थे बहुत करीब से उसने ।
एक शिल्पी सा तराशना चाहता था वो 
अनछुए पहलुओं कों ।
बनाना चाहता था 
पत्थर को भी भगवान ।
उसकी बातों में था 
अज़ीब सा सम्मोहन 
सादगी और लावण्य का 
पर्याय थी उसकी विनम्रता ।
अचानक आई वक़्त की 
तेज आंधी ने 
नफरत की ऐसी दिवार खड़ी करदी 
जिसने सारे तिलिस्म कों 
झकझोर कर रख दिया ।
किसी और दुनियां से आया 
वो किरदार 
गुमनाम बस्ती में कहीं खो गया 
शायद फिर से लौट आए वो शिल्पी 
और तराश जाये पत्थर को 
भगवान की तरह ............,

# डॉ अनिल जैन उपहार

Wednesday, February 15, 2023

मुक्तक (दिलासा)

दुहाई दे के रस्मों की ,वो दामन छोड़ जाता है ।

भिगो कर रोज़ ही पलकें ,वो सावन छोड़ जाता है ।

बड़ी शिद्दत से उसके आगमन की चिर प्रतीक्षा थी 

दिलासा दे के उम्मीदों का ,दर्पण तोड़ जाता है ।

अनिल जैन उपहार