काव्यांजलि
Thursday, December 28, 2023
मुक्तक(आंखों ही आंखों)
होले होले कानों में रस घोल गया।
बिन बोले ही मन के तराजू तोल गया।
उसकी सांसों की सरगम कुछ ऐसी थी,
आंखों हो आंखों में सब कुछ बोल गया।
डॉ अनिल जैन उपहार
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