काव्यांजलि
Friday, December 29, 2023
दोहावली
गुलमोहर भी मोन है,तुलसी भई उदास।
अब तो उगने लग गए कैक्टस घर के पास।
अपनी अपनी उंगलियां अपने अपने राग।
हंस देखते रह गए मोती चुग गए काग।
बूढ़ी आंखे ताकती वृद्धा श्रम दिन रात
छोड़ा बेटों ने सभी,मां का पावन साथ।
डा अनिल जैन उपहार
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