Friday, April 5, 2024

मन देहरी (मुक्तक)

द्वार द्वार देहरी देहरी पर हमने वंदनवार सजाए।

कुछ गीतों के कलश रखे कुछ भावों के अर्घ्य चढ़ाए।

शगुन के अक्षत मन आंगन पर धरे कामना यूं बोली,

नेह से व्याकुल निष्ठुर मन को कोई कैसे क्या समझाए।

डा अनिल जैन उपहार

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