Wednesday, April 10, 2024

मुक्तक(मुस्कान लिखो)

चेहरे पर मुस्काने हो, सदभावों को उपमान लिखो।
सप्तपदी की परंपरा का नूतन सा दिनमान लिखो।
जीवन पथ पर आशाओं के बिंब उकेरो बस हर पल,
सप्त पदों की सरगम सा फिर कोई यशगान लिखो।

डा अनिल जैन उपहार

No comments:

Post a Comment