Tuesday, January 21, 2014

   हाँ ये औरत है 
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रोज की भागम भाग,
सीने में दबाये दहकती आग 
वक़्त की मार,
तानों की बोछार,
दोहरी जिंदगी कों 
ढो रही सदियों से |
अपनों से छली गई,
तंदूर में तली गई,
समर्पण की त्रासदी कों 
कब तलक पीती रहेगी ?
हाँ 
यह औरत है |
सब कुछ सहती रहेगी |
बीबी किसी की 
बेटी किसी की 
बहन किसी की 
सब कुछ लुटाकर 
अपनों के बीच 
खुद कों मिटाकर 
देहरी के दीप सी 
जलती रहेगी |
हाँ 
यह औरत है 
सब कुछ सहती रहेगी |
----(अनिल उपहार )
'काव्यांजलि' पिडावा जिला 
झालावाड (राज.)326034

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