हाँ ये औरत है
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रोज की भागम भाग,
सीने में दबाये दहकती आग
वक़्त की मार,
तानों की बोछार,
दोहरी जिंदगी कों
ढो रही सदियों से |
अपनों से छली गई,
तंदूर में तली गई,
समर्पण की त्रासदी कों
कब तलक पीती रहेगी ?
हाँ
यह औरत है |
सब कुछ सहती रहेगी |
बीबी किसी की
बेटी किसी की
बहन किसी की
सब कुछ लुटाकर
अपनों के बीच
खुद कों मिटाकर
देहरी के दीप सी
जलती रहेगी |
हाँ
यह औरत है
सब कुछ सहती रहेगी |
----(अनिल उपहार )
'काव्यांजलि' पिडावा जिला
झालावाड (राज.)326034
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रोज की भागम भाग,
सीने में दबाये दहकती आग
वक़्त की मार,
तानों की बोछार,
दोहरी जिंदगी कों
ढो रही सदियों से |
अपनों से छली गई,
तंदूर में तली गई,
समर्पण की त्रासदी कों
कब तलक पीती रहेगी ?
हाँ
यह औरत है |
सब कुछ सहती रहेगी |
बीबी किसी की
बेटी किसी की
बहन किसी की
सब कुछ लुटाकर
अपनों के बीच
खुद कों मिटाकर
देहरी के दीप सी
जलती रहेगी |
हाँ
यह औरत है
सब कुछ सहती रहेगी |
----(अनिल उपहार )
'काव्यांजलि' पिडावा जिला
झालावाड (राज.)326034
nice
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