हमने तो गुलशन सौंपा ,तुम मसल गए फुलवारी को ।
दाग लगा दामन पर माँ के ,निकल गए मक्कारी को ।
पलकों पर था तुम्हे बिठाया ,पल भर में ही भूल गए ।
औकात दिखा कर नीचे गिरना ,देख लिया अंसारी को ।
अनिल उपहार
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