Friday, August 11, 2017

हामिद अंसारी(मुक्तक)

हमने तो गुलशन सौंपा  ,तुम मसल गए फुलवारी को ।

दाग लगा दामन पर माँ के ,निकल गए मक्कारी को ।

पलकों पर था तुम्हे बिठाया ,पल भर में ही भूल गए ।

औकात दिखा कर नीचे गिरना ,देख लिया अंसारी को ।

अनिल उपहार

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