काव्यांजलि
Saturday, May 11, 2024
लेखा कर्मो का(
स्मृति के गलियारों में ,कर्मो का लेखा जांच रहा हूं।
मैं अतीत के धुंधले पन्ने ,तोल मोल कर बांच रहा हूं।
जीवन की अंतिम सांसों की, गठरी कुछ खामोश पड़ी है।
कितना छल कितना धोखा पल पल देखा किश्त बड़ी है।
डा अनिल जैन उपहार
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