Monday, May 13, 2024

मुक्तक(खामोशी की ओढ़ के चादर)

खामोशी की ओढ़ के चादर बिन बोले रह जाते है ।
कुछ सपने पलकों पर आकर अलसाये रह जाते है ।
माना शोहरत और ये दौलत रहन तुम्हारे आंगन में,
कुछ किस्से ऐसे  होते है बिना कहे कह जाते है ।

डा अनिल जैन उपहार

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