Wednesday, May 15, 2024

मुक्तक (रिश्तों का मंडप)

रिश्तों के मंडप के नीचे भाव समर्पण होता है।

संस्कारों का शामियाना महिमा मंडित होता है ।

कभी वहम की चिंगारी जब अहम पे भारी हो जाए,

तब नैतिक मूल्यों का दर्पण अपना वैभव खोता है ।

डा अनिल जैन उपहार

No comments:

Post a Comment