काव्यांजलि
Thursday, May 16, 2024
मुक्तक (रस्मे उल्फत)
रस्में उल्फत की अपने दिल में रवानी रखना।
फिर से मिलने ओ मिलाने की कहानी रखना।
लाख हो जुल्म के पहरे वफा की राहों में,
अपनी आंखों में मुहोब्बत की निशानी रखना।
डा अनिल जैन उपहार
No comments:
Post a Comment
‹
›
Home
View web version
No comments:
Post a Comment