काव्यांजलि
Saturday, April 27, 2024
संवाद हीनता(मुक्तक)
संवाद हीनता बढ़ती जाती रिश्ते रोज़ दरकते है।
संबंधों के कैनवास पर पथराए नयन तरसते है।
खामोशी को ओढ़ अधर सहमे सहमे रहते है,
अवसादों के घने से बादल आंगन रोज बरसते है।
डा अनिल जैन उपहार
Friday, April 26, 2024
गांव की याद (मुक्तक)
रूखा सूखा खाकर भी नित नींद चैन की सोते थे।
रोज चोपालें सजती थी सब नेक फैसले होते थे।
वक्त की आंधी खूब चली रूठ गई पीपल की छांव,
याद बहुत आता है मीठे सपनों का वो अपना गांव।
डा अनिल जैन उपहार
Friday, April 19, 2024
मुक्तक (सहजता)
सहजता की क्या कीमत है कभी तुम जान न पाए।
मिली मेहनत से ये शोहरत कभी तुम मान न पाए।
रही छलती सदा ही भावनाए कामनाओं को,
वजह बस इतनी ही सी थी यही तुम जान न पाए।
डा अनिल जैन उपहार
शेर
माना तुम्हारे कद से ऊंचा कद नहीं मेरा।
पर साजिशों ने हर घड़ी संवारा है मुझे।
डा अनिल
Sunday, April 14, 2024
मुक्तक (अंतर)
तुम इंतज़ार से रहे सदा,मैं नेह दीप की बाती सा।
तुम स्मृति के शिलालेख से,मैं धुंधली सी पाती सा।
कुछ जटिल प्रश्न थे हल हो कैसे लगे रहे इस उलझन में,
तुम भौतिकता की चकाचौंध,मैं पुरातन परिपाटी सा।
डा अनिल जैन उपहार
Wednesday, April 10, 2024
मुक्तक(मुस्कान लिखो)
चेहरे पर मुस्काने हो, सदभावों को उपमान लिखो।
सप्तपदी की परंपरा का नूतन सा दिनमान लिखो।
जीवन पथ पर आशाओं के बिंब उकेरो बस हर पल,
सप्त पदों की सरगम सा फिर कोई यशगान लिखो।
डा अनिल जैन उपहार
Friday, April 5, 2024
मन देहरी (मुक्तक)
द्वार द्वार देहरी देहरी पर हमने वंदनवार सजाए।
कुछ गीतों के कलश रखे कुछ भावों के अर्घ्य चढ़ाए।
शगुन के अक्षत मन आंगन पर धरे कामना यूं बोली,
नेह से व्याकुल निष्ठुर मन को कोई कैसे क्या समझाए।
डा अनिल जैन उपहार
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