[10:35AM, 17/11/2015] aniluphar123: चेतना के गीत गाने से कभी डरता नही हूँ ।
हार कर दिल की हुकूमत नेह में करता नही हूँ ।
हो सियासी दाव कैसे भी मगर हारा नही मैं ।
जिंदगी पर मौत के मैं दस्तखत करता नही हूँ ।
---------अनिल उपहार -----
[2:59PM, 18/11/2015] aniluphar123: वफ़ा की राह में कमसिन कहानी कौन रखता है ।
बचा के शान से अपनी जवानी कौन रखता है ।
नही मेरी वफाओ को कभी इलज़ाम तुम देते
दिलों में प्यार की कोई निशानी कौन रखता है ।
------अनिल उपहार
[10:42AM, 19/11/2015] aniluphar123: गीत फिर से प्यार का तू गुन गुनाकर देख ले ।
मीत रूठा है उसे फिर से मनाकर देख ले ।
जीत हो या हार हो सब पूण्य की ही बात है
तू किसी के दर्द को अपना बनाकर देख ले ।
---------अनिल उपहार
[1:19PM, 20/11/2015] aniluphar123: यहाँ कोई नही अपना न अब तक मान पाया मैं ।
वफ़ा तो पाक होती है कहाँ पहचान पाया मैं ।
किसी की आँख से आंसू चुरा पलकों पे रख लेना
मुहोब्बत किसको कहते है उसी दिन जान पाया मैं ।
------;अनिल उपहार
[12:47PM, 25/11/2015] aniluphar123: बीज नफरत के अब बो रहा आदमी
लाश खुद की यहाँ ढो रहा आदमी ।
जानकर भी जो अनजान है इस कदर
भीड़ की भीड़ में खो रहा आदमी ।
------अनिल उपहार
[1:28PM, 03/12/2015] aniluphar123: किये तुमसे जो वादे थे उन्हें बस तोड़ आये है ।
बिना बैसाखी के पीछे तेरे हम दौड़ आये है ।
वफ़ा की राह में कंकर मिले या फिर मिले कांटे
किसी के दर पे दिल की हर तमन्ना छोड़ आये है ।
--------अनिल उपहार
[12:12PM, 07/12/2015] aniluphar123: खुदा के वास्ते उसको मेरा दिलदार लिख देना ।
यही है आरज़ू दिल की हंसी संसार लिख देना ।
सुनो शिल्पी तराशा तुमने देकर चोट पत्थर को
कभी तुम प्रीत लिख देना कभी मनुहार लिख देना ।
---------अनिल उपहार
[10:01AM, 09/12/2015] aniluphar123: भावनाओं के सेतु से तुम्हारा
बैखोफ गुज़र जाना ।
और कदम दर कदम
छोड़ जाना ऐसे निशां
जिन पर लिखे को
कोई बांच नही सकता ।
नफरत की अंधी खाई को
कोई पाट नही सकता ।
शायद ये फितरत नही तुम्हारी
सिर्फ फ़िज़ा में छाया वो धुंवा है
जो देखने नही देता
तुम्हारी आँखों कों
रिश्तों की सच्चाई ।
तभी तो उतर आते है
इन आँखों में संशय के ज्वार ।
और लगा देते है
अपनी परम्परागत मुहर
पराये को पराया समझते रहने की ।
---;;;;अनिल उपहार
[9:35AM, 12/12/2015] aniluphar123: रूप की धूप में वो जलाने लगे ।
गीत फिर से लबों पर सजाने लगे ।
राज़ उनसे वफ़ा का लगे जानने
छोड़ कर वो हमे दूर जाने लगे ।
------अनिल उपहार
[6:22PM, 30/12/2015] aniluphar123: मचलती हसरतों कों दे नयी रस्मो अदाई हम ।
उखड़ती साँस कों दे फिर से जीवन की दुहाई हम ।
तमस कों हारना होगा यहाँ अब तो उजालो से
गुजरते साल कों दें भावभीनी अब विदाई हम ।
-------;-अनिल उपहार ---;;;
[2:18PM, 31/12/2015] aniluphar123: गुज़र गया सो गुज़र गया मत मारो उसकों ताने ।
भोर खड़ी है दरवाज़े पर मंगलाचार नूतन गाने ।
नये वर्ष की अगवानी में बस रहे हर्ष उत्कर्ष
नेह भरे घट अब ना रीते स्वागत है नव वर्ष ।।
-------अनिल उपहार -----
[3:56PM, 02/01/2016] aniluphar123: नये साल की हार्दिक शुभ कामनाये ।
-----;--/---------
नयी भौर के आँगन गूंजे मंगल मंगलाचार ।
सूरज ने भी आकर बांधी स्वर्णिम वंदनवार ।
जूही ने गज़रा क्या गूंथा महक उठी गलमाल
साल सोलहवा लगा सखी क्यों न करूँ श्रृंगार ।
------//@अनिल उपहार ---
[1:53PM, 03/01/2016] aniluphar123: दर्द लिख कर उम्र भर की दासता ढोते रहे ।
एक अदद मुस्कान कों पहचान वो खोते रहे ।
अपने हिस्से की ख़ुशी भी रास न आई जिन्हें
शब्द के फनकार कवि भी प्यार कर रोते रहे ।
------अनिल उपहार
[12:06PM, 06/01/2016] aniluphar123: पठान कोट एयरबेस घटना पर ।
मिलाओ हाथ कितने भी लगाओ या गले उनको ।
दिए जो ज़ख्म उसने फिर भुलादो तुम भले उनको ।
शहीदों की शहादत कह रही है अश्क भर तुमसे
कि छप्पन इंची सीने का दिखादो दम ज़रा उनको ।
-----अनिल उपहार
[9:05PM, 07/01/2016] aniluphar123: अगर था फासला नजदीकियां सच हम बढ़ाएंगे ।
गगन के चाँद सूरज क्या सितारे तोड़ लाएंगे ।
तराने प्यार के अपने ज़माना गुन गुनायेगा
कसम है सात फेरों की वफ़ा तुमसे निभाएंगे ।
-----अनिल उपहार
[11:41AM, 08/01/2016] aniluphar123: छंद कविता गीत की पहचान हो ।
शब्दावली हो प्रीत की यशगान हो ।
मैं भले ही कह नहीं पाया ज़ुबाँ से
मैं ग़ज़ल हूँ मीत तुम अरकान हो ।
---;;;अनिल उपहार ------;;;;
[3:43PM, 13/01/2016] aniluphar123: मेरा मोल लगा बैठे ऐसी उनकी औकात नही ।
स्वाभिमान गिरवी रख दूँ मैं ऐसे भी हालात नही ।
मैंने तो बस वो लिक्खा है जिसे ह्रदय ने पढ़ा गौर से
बीच सड़क पर जो बिक जाये मेरे वो जज़्बात नही ।
------अनिल उपहार
[12:03PM, 14/01/2016] aniluphar123: वेदिक ऋचाओं सा सुरीला गान बेटियां
मंदिर की आरती भी है अज़ान बेटियां
श्लोक की तरह इन्हें गुन गुनाइये
गीता है बाइबिल है और कुरआन बेटिया ।
-----अनिल उपहार
[12:00PM, 18/01/2016] aniluphar123: अंतस की इस ऊहा पोह में कैसे दस्तक द्वार लगाऊँ ।
रूठ गयी अब मन की देहरी कैसे वंदनवार सजाऊँ ।
समृति के अलसाये पन्ने और व्याकरण भी गहरा है
शब्दकोष भी विवश लगता अब कैसे प्रतिमान जुटाउँ ।
--------अनिल उपहार -----
[10:38PM, 02/02/2016] aniluphar123: ज़माने भर की बातों को न यूँ दिल से लगाओ तुम ।
लिखे जो प्रेम के आखर पढ़ो सबको पढ़ाओ तुम ।
हुआ जब भी दखल गैरो का तो परिवार टूटे है
पढ़ा दो प्रेम की भाषा न नज़रो से गिराओ तुम ।
------अनिल उपहार
[9:38AM, 09/02/2016] aniluphar123: तुम्हारी हर अदा लगती भला अब चॉकलेटी है ।
तेरी हर बात मिश्री की डाली सच चॉकलेटी है ।
चलन रिश्ते निभाने का सलीका क्या गजब तेरा
तेरी हर इक छुअन लगती यहाँ अब चॉकलेटी है ।
-----अनिल उपहार---
[12:24PM, 12/02/2016] aniluphar123: ओ वीणापाणी आज ह्रदय के तारों को झंकृत कर दो ।
बैठो जीभ की जाजम पर हर इक शब्द अलंकृत कर दो ।
दौलत और ये शौहरत तो बस तेरी आज बदौलत है ।
मेरे गीत ग़ज़ल छंदों को आओ आज परिष्कृत कर दो ।
अनिल उपहार ।।।।
हार कर दिल की हुकूमत नेह में करता नही हूँ ।
हो सियासी दाव कैसे भी मगर हारा नही मैं ।
जिंदगी पर मौत के मैं दस्तखत करता नही हूँ ।
---------अनिल उपहार -----
[2:59PM, 18/11/2015] aniluphar123: वफ़ा की राह में कमसिन कहानी कौन रखता है ।
बचा के शान से अपनी जवानी कौन रखता है ।
नही मेरी वफाओ को कभी इलज़ाम तुम देते
दिलों में प्यार की कोई निशानी कौन रखता है ।
------अनिल उपहार
[10:42AM, 19/11/2015] aniluphar123: गीत फिर से प्यार का तू गुन गुनाकर देख ले ।
मीत रूठा है उसे फिर से मनाकर देख ले ।
जीत हो या हार हो सब पूण्य की ही बात है
तू किसी के दर्द को अपना बनाकर देख ले ।
---------अनिल उपहार
[1:19PM, 20/11/2015] aniluphar123: यहाँ कोई नही अपना न अब तक मान पाया मैं ।
वफ़ा तो पाक होती है कहाँ पहचान पाया मैं ।
किसी की आँख से आंसू चुरा पलकों पे रख लेना
मुहोब्बत किसको कहते है उसी दिन जान पाया मैं ।
------;अनिल उपहार
[12:47PM, 25/11/2015] aniluphar123: बीज नफरत के अब बो रहा आदमी
लाश खुद की यहाँ ढो रहा आदमी ।
जानकर भी जो अनजान है इस कदर
भीड़ की भीड़ में खो रहा आदमी ।
------अनिल उपहार
[1:28PM, 03/12/2015] aniluphar123: किये तुमसे जो वादे थे उन्हें बस तोड़ आये है ।
बिना बैसाखी के पीछे तेरे हम दौड़ आये है ।
वफ़ा की राह में कंकर मिले या फिर मिले कांटे
किसी के दर पे दिल की हर तमन्ना छोड़ आये है ।
--------अनिल उपहार
[12:12PM, 07/12/2015] aniluphar123: खुदा के वास्ते उसको मेरा दिलदार लिख देना ।
यही है आरज़ू दिल की हंसी संसार लिख देना ।
सुनो शिल्पी तराशा तुमने देकर चोट पत्थर को
कभी तुम प्रीत लिख देना कभी मनुहार लिख देना ।
---------अनिल उपहार
[10:01AM, 09/12/2015] aniluphar123: भावनाओं के सेतु से तुम्हारा
बैखोफ गुज़र जाना ।
और कदम दर कदम
छोड़ जाना ऐसे निशां
जिन पर लिखे को
कोई बांच नही सकता ।
नफरत की अंधी खाई को
कोई पाट नही सकता ।
शायद ये फितरत नही तुम्हारी
सिर्फ फ़िज़ा में छाया वो धुंवा है
जो देखने नही देता
तुम्हारी आँखों कों
रिश्तों की सच्चाई ।
तभी तो उतर आते है
इन आँखों में संशय के ज्वार ।
और लगा देते है
अपनी परम्परागत मुहर
पराये को पराया समझते रहने की ।
---;;;;अनिल उपहार
[9:35AM, 12/12/2015] aniluphar123: रूप की धूप में वो जलाने लगे ।
गीत फिर से लबों पर सजाने लगे ।
राज़ उनसे वफ़ा का लगे जानने
छोड़ कर वो हमे दूर जाने लगे ।
------अनिल उपहार
[6:22PM, 30/12/2015] aniluphar123: मचलती हसरतों कों दे नयी रस्मो अदाई हम ।
उखड़ती साँस कों दे फिर से जीवन की दुहाई हम ।
तमस कों हारना होगा यहाँ अब तो उजालो से
गुजरते साल कों दें भावभीनी अब विदाई हम ।
-------;-अनिल उपहार ---;;;
[2:18PM, 31/12/2015] aniluphar123: गुज़र गया सो गुज़र गया मत मारो उसकों ताने ।
भोर खड़ी है दरवाज़े पर मंगलाचार नूतन गाने ।
नये वर्ष की अगवानी में बस रहे हर्ष उत्कर्ष
नेह भरे घट अब ना रीते स्वागत है नव वर्ष ।।
-------अनिल उपहार -----
[3:56PM, 02/01/2016] aniluphar123: नये साल की हार्दिक शुभ कामनाये ।
-----;--/---------
नयी भौर के आँगन गूंजे मंगल मंगलाचार ।
सूरज ने भी आकर बांधी स्वर्णिम वंदनवार ।
जूही ने गज़रा क्या गूंथा महक उठी गलमाल
साल सोलहवा लगा सखी क्यों न करूँ श्रृंगार ।
------//@अनिल उपहार ---
[1:53PM, 03/01/2016] aniluphar123: दर्द लिख कर उम्र भर की दासता ढोते रहे ।
एक अदद मुस्कान कों पहचान वो खोते रहे ।
अपने हिस्से की ख़ुशी भी रास न आई जिन्हें
शब्द के फनकार कवि भी प्यार कर रोते रहे ।
------अनिल उपहार
[12:06PM, 06/01/2016] aniluphar123: पठान कोट एयरबेस घटना पर ।
मिलाओ हाथ कितने भी लगाओ या गले उनको ।
दिए जो ज़ख्म उसने फिर भुलादो तुम भले उनको ।
शहीदों की शहादत कह रही है अश्क भर तुमसे
कि छप्पन इंची सीने का दिखादो दम ज़रा उनको ।
-----अनिल उपहार
[9:05PM, 07/01/2016] aniluphar123: अगर था फासला नजदीकियां सच हम बढ़ाएंगे ।
गगन के चाँद सूरज क्या सितारे तोड़ लाएंगे ।
तराने प्यार के अपने ज़माना गुन गुनायेगा
कसम है सात फेरों की वफ़ा तुमसे निभाएंगे ।
-----अनिल उपहार
[11:41AM, 08/01/2016] aniluphar123: छंद कविता गीत की पहचान हो ।
शब्दावली हो प्रीत की यशगान हो ।
मैं भले ही कह नहीं पाया ज़ुबाँ से
मैं ग़ज़ल हूँ मीत तुम अरकान हो ।
---;;;अनिल उपहार ------;;;;
[3:43PM, 13/01/2016] aniluphar123: मेरा मोल लगा बैठे ऐसी उनकी औकात नही ।
स्वाभिमान गिरवी रख दूँ मैं ऐसे भी हालात नही ।
मैंने तो बस वो लिक्खा है जिसे ह्रदय ने पढ़ा गौर से
बीच सड़क पर जो बिक जाये मेरे वो जज़्बात नही ।
------अनिल उपहार
[12:03PM, 14/01/2016] aniluphar123: वेदिक ऋचाओं सा सुरीला गान बेटियां
मंदिर की आरती भी है अज़ान बेटियां
श्लोक की तरह इन्हें गुन गुनाइये
गीता है बाइबिल है और कुरआन बेटिया ।
-----अनिल उपहार
[12:00PM, 18/01/2016] aniluphar123: अंतस की इस ऊहा पोह में कैसे दस्तक द्वार लगाऊँ ।
रूठ गयी अब मन की देहरी कैसे वंदनवार सजाऊँ ।
समृति के अलसाये पन्ने और व्याकरण भी गहरा है
शब्दकोष भी विवश लगता अब कैसे प्रतिमान जुटाउँ ।
--------अनिल उपहार -----
[10:38PM, 02/02/2016] aniluphar123: ज़माने भर की बातों को न यूँ दिल से लगाओ तुम ।
लिखे जो प्रेम के आखर पढ़ो सबको पढ़ाओ तुम ।
हुआ जब भी दखल गैरो का तो परिवार टूटे है
पढ़ा दो प्रेम की भाषा न नज़रो से गिराओ तुम ।
------अनिल उपहार
[9:38AM, 09/02/2016] aniluphar123: तुम्हारी हर अदा लगती भला अब चॉकलेटी है ।
तेरी हर बात मिश्री की डाली सच चॉकलेटी है ।
चलन रिश्ते निभाने का सलीका क्या गजब तेरा
तेरी हर इक छुअन लगती यहाँ अब चॉकलेटी है ।
-----अनिल उपहार---
[12:24PM, 12/02/2016] aniluphar123: ओ वीणापाणी आज ह्रदय के तारों को झंकृत कर दो ।
बैठो जीभ की जाजम पर हर इक शब्द अलंकृत कर दो ।
दौलत और ये शौहरत तो बस तेरी आज बदौलत है ।
मेरे गीत ग़ज़ल छंदों को आओ आज परिष्कृत कर दो ।
अनिल उपहार ।।।।