Saturday, August 26, 2017

राम रहीम की घटना पर ,(छंद)

चमचो की चमचागिरी,अफसरों की अफ़सरगिरी ,नेताओं की नेतागिरी ,देखली जी देश ने ।

दुष्टों की भी दुष्टगिरी,भ्रष्टों की भी भ्रष्टगिरी, गुंडो की भी गुंडागिरी देखली जी देश ने ।

वोटों के ही सर पे दुशाले ताने खड़े जो मुलायम की दादागिरी देखली जी देश ने ।

पुरुषों की गोद मे जा धम से पसर जाना ,राधे माँ की राधागिरी देखली जी देश ने ।

अनिल जैन उपहार

Tuesday, August 22, 2017

कविता(सपने)

अंतहीन ही तो है
ये सपनो का सफर ।
जिसे मन ने कभी
चाहा नही
आंखों ने उसे देख लिया
हृदय जिसे पढ़ना चाहता है
आंखे उसे देख ती भी कहाँ है
रिश्तो के साये में
अलसाते संवेदना के पखेरू
द्वार पर आहट देती
मौन की तिलिस्मी चादर
कोई तो है जो खो गया है
यादों के कोहरे में ।

अनिल उपहार

Saturday, August 12, 2017

मुक्तक

तू ही किरदार रहा है मेरे फसाने का ।

तू ही अंदाज़े बयां है मेरे तराने का ।

मेरे अधरों पे जो मचले वो गीत भी तू है

तुझसे सीखा है हुनर मैंने गुनगुनाने का ।

अनिल जैन उपहार

Friday, August 11, 2017

हामिद अंसारी(मुक्तक)

हमने तो गुलशन सौंपा  ,तुम मसल गए फुलवारी को ।

दाग लगा दामन पर माँ के ,निकल गए मक्कारी को ।

पलकों पर था तुम्हे बिठाया ,पल भर में ही भूल गए ।

औकात दिखा कर नीचे गिरना ,देख लिया अंसारी को ।

अनिल उपहार

Friday, August 4, 2017

बिन तेरे(कविता)

सरगोशियां करती रही
खामोशियाँ
रात भर
भेद जानने को आतुर
रात का अंतिम प्रहर ।
जल रहा है अंतस का
पोर पोर ।
सावन की बूंदों ने
डाल दिया हो घी जैसे ।
उदास मन
भीगते नयन
मन की दहलीज के
सूने पन को ताकती
अनचाही आहट की प्रतीक्षा में ,
बिस्तर की सिलवटों ने
कर दिए है दर्ज
अपने  बयान ।
मन मुजरिम सा
काट रहा है सजा
अपने निर्दोष होने की ।
बिन तेरे,,,,,,,,

अनिल जैन उपहार

Thursday, August 3, 2017

हिंदी एक वैज्ञानिक भाषा है और कोई भी अक्षर वैसा क्यूँ है उसके पीछे कुछ कारण है , अंग्रेजी भाषा में ये बात देखने में नहीं आती | ______________________ क, ख, ग, घ, ङ- कंठव्य कहे गए, क्योंकि इनके उच्चारण के समय ध्वनि कंठ से निकलती है। एक बार बोल कर देखिये | च, छ, ज, झ,ञ- तालव्य कहे गए, क्योंकि इनके उच्चारण के समय जीभ तालू से लगती है। एक बार बोल कर देखिये | ट, ठ, ड, ढ , ण- मूर्धन्य कहे गए, क्योंकि इनका उच्चारण जीभ के मूर्धा से लगने पर ही सम्भव है। एक बार बोल कर देखिये | 😀 त, थ, द, ध, न- दंतीय कहे गए, क्योंकि इनके उच्चारण के समय जीभ दांतों से लगती है। एक बार बोल कर देखिये | प, फ, ब, भ, म,- ओष्ठ्य कहे गए, क्योंकि इनका उच्चारण ओठों के मिलने पर ही होता है। एक बार बोल कर देखिये । 😀 ________________________ हम अपनी भाषा पर गर्व करते हैं ये सही है परन्तु लोगो को इसका कारण भी बताईये | इतनी वैज्ञानिकता दुनिया की किसी भाषा मे नही है कृपया इस ज्ञान की जानकारी सभी को अग्र प्रेषित करें ।