अगर तुम आओ अपनी हाजरी देने
तो खामोशियों के दस्तावेज साथ मत लाना।
पैरवी कर रही निगाहों ने
दे दिया है हलफनामा
अपनी गवाही का,
फैसले की प्रतीक्षा
करना है मिलकर
उदासियों के द्वार की
चाबी
हो सके तो लेते आना ।
अनिल जैन उपहार
अगर तुम आओ अपनी हाजरी देने
तो खामोशियों के दस्तावेज साथ मत लाना।
पैरवी कर रही निगाहों ने
दे दिया है हलफनामा
अपनी गवाही का,
फैसले की प्रतीक्षा
करना है मिलकर
उदासियों के द्वार की
चाबी
हो सके तो लेते आना ।
अनिल जैन उपहार
गीत (श्रृंगार)
शब्द सारे आरती के ,गान में ही ढल गए ।
तुम मिले तो जिंदगी के ,मायने बदल गए ।
भावना ने कामना की ,अर्चना की इस तरह
मन की सूनी देहरी पे ,दीप सारे जल गए ।
(1)
वेदना की गोद पा के रचना यू संवर गयी ।
तृप्ति से अनुबंध हुआ अधरों पे निखर गयी ।
सपनों को पंख लगे , पंछी से उड़ गए
तुम मिले तो जिंदगी के मायने बदल गए ।
(2)
नेह निमंत्रण मिला ,जब हृदय की ओर से ।
मन की कलियां उमड़ पड़ी स्वागत में भोर के
वंदना को स्वर मिले ,साधना में ढल गए
तुम मिले तो जिंदगी के ,मायने बदल गए ।
(3)
बेड़ियां रवायतों की टूटकर बिखर गई ।
धड़कनों ने साज छेड़े , ज़िंदगी निखर गई ।
सांसों की उर्मियों में ,स्वप्न सारे पल गए
तुम मिले तो जिंदगी के ,मायने बदल गए ।
(4)
अर्घ समर्पण के चढ़े ,चाहत के थाल में ।
देह देवालय सा लगा, आस्था के काल मे ।
इक छुअन के वास्ते ,दो नयन मचल गए
तुम मिले तो जिंदगी के ,मायने बदल गए ।
अनिल उपहार
ओ युगदृष्टा युग नायक ओ महामनीषी तुम्हे नमन।
ओ अखिल विश्व के जन नायक ओ क्रान्तिदृष्टा गुरु तुम्हे नमन।
सबल राष्ट्र के विश्व विजेता ,शांतिदूत स्वीकारो नमन।
ओ मानवता के महा मसीहा सकल विश्व का तुम्हे नमन ।
अनिल जैन उपहार