Wednesday, January 19, 2022

गीतिका /गोद मे मां की

कभी प्यार में फिसल के देखो ।

अंधियारों कों निगल के देखो ।

 खाकर ज़ख्म संभल के देखो ।

अपनी सोच बदल के देखो ।

खुशियों से भर जाओगे तुम 

 गोद में माँ की मचल के देखो।

-------डॉ-अनिल जैन उपहार ----

Sunday, January 9, 2022

मुक्तक आशा और निराशा

चाहे ज़ख्म सहे होंगे, हर चोट नेह की भाषा है ।

तारे गिन गिन रात गुज़ारें ,जीवन की अभिलाषा है ।

दोराहे पर शब्द मौन है ,भोर खड़ी है द्वारे पर 

रात यही कहती है दिन से ,घोर निराशा में आशा है ।

###डॉ अनिल जैन उपहार

Wednesday, January 5, 2022

मुक्तक पले जो खार दामन में

पलें जो खार दामन में ज़रा उनकों गला देना  ।

मिलें जो दंश अपनों से उन्हें दिल से भुला देना ।

उजाले फिर न भटकेंगे कभी ग़म के अंधेरों में 

बुझाये जो कभी दीपक उन्हें फिरसे जला देना ।

-----------डॉ अनिल जैन उपहार -------