Monday, July 24, 2023

लहज़ा (कविता,)

ये जो तुम्हारे सख्त लहज़े की 
तहरीर  है न 
बड़ा नर्म अहसास 
कराती है 
पथराई आंखों को ।
शायद इन्ही में गुम तो 
नहीं 
हौसलो के पर 
जो खींच लाये है 
तुम्हे धरती से 
आसमा पर ।

अनिल जैन उपहार

Monday, July 10, 2023

मुक्तक दुआओं का असर

आज सच दुआओ में असर आया है ।

चाँद फिर मेरे आँगन में उतर आया है ।

उसके लहजे को कई बार पढ़ा था मैंने

कोई  तो है जो आँखों में उभर आया है ।

अनिल उपहार

मुक्तक( असर)

आज सच दुआओ में असर आया है ।

चाँद फिर मेरे आँगन में उतर आया है ।

उसके लहजे को कई बार पढ़ा था मैंने

अक्स जैसे कोई आँखों में उभर आया है ।

अनिल उपहार

Saturday, July 8, 2023

गीतिका

लेखनी बेबस जुबा खामोश है 
कैसे कहदूँ कि तू मेरे पास है ।
बिन तेरे कुछ और भाता नहीं
तू है कि लौट कर आता नहीं ।
छंद का अनुप्रास हो तुम
गीत का आगाज़ हो तुम।
ग़ज़ल का उनवान भी तुम
साहित्य का दिनमान भी तुम।
व्याकरण हो तुम ही रस्मों रीत का
हो सुखद अहसास पहली प्रीत का।
फिर भी तेरे होने का हर घड़ी अहसास है 
गीत भी तुम ही मेरा ,तू ही मधुर आवाज़ है।

डॉ अनिल जैन उपहार (कॉपीराइट)

Wednesday, July 5, 2023

आमंत्रण(कविता)

बादलों से झरता अमृत
मेघ मल्हार गाती
शीतल पवन,
गुमसुम सी नदी
लिए बैठी है 
सृजन का थाल।
अधर बांच रहे है
अनकहा 
नयन गढ़ रहे है 
नवीन परिभाषा।
सांसों का संगीत
दे रहा है मौन आमंत्रण
कि कोई आए और
लिख जाए नवगीत
पुनः मिलन का।

डा अनिल

Tuesday, July 4, 2023

मासूम की पुकार

मासूम चीत्कार
,,,,,,,,,,
दरख़्तों पर पड़ी 

बारिश की पहली बून्द ने 

नन्ही कोंपल के बदन पर

सुरमई हस्ताक्षर क्या किये

उसका पोर पोर 

किलकारियों से गूंजने लगा ।

ठीक उसी तरह 

तुम्हारी देह के किसी कोने में ,

मेरी आहट पा, ख़ुशी से सराबोर 

होगई थी तुम ।

लेकिन मेरा होना 

तुम्हारी इच्छाओ को लील गया 

और मेरे जनक की रूढ़िवादी 

विचार धारा ने तुम्हारी ममता को 

तार तार कर दिया ।

छोड़ आई तुम मुझे अपनी ममता से 

दूर 

और कर दिया 

शांत खामोश सदा के लिए ।।।।।।।

 डॉ अनिल जैन उपहार

Sunday, July 2, 2023

मुक्तक(आमंत्रण)

शीतल शीतल मन्द फुहारेँ देती मौन निमँत्रण है ।

देख के सुध बुध भूल गया बेबस मन का दर्पण है ।

प्रीत की पायल खनक रही है ,कहती दिल की धडकन है ,

साँसोँ मेँ बस आकर बसजा ह्रदय का ये आमंत्रण है।

डॉ अनिल जैन उपहार