Friday, July 29, 2016

मुक्तक

अमृत के घट रीते सारे ,बस किस्मत का मारा हूँ ।

विषयों के बंधन ने जकड़ा ,तोड़ न पाया कारा हूँ ।

दम्भ दलन करने वाली वो,लड़ियाँ पल पल टूट गई

काँटों से तो जीत गया था ,पर फूलों से हारा हूँ ।

अनिल उपहार

Tuesday, July 26, 2016

अब्दुल कलाम

अब्दुल कलाम तुझे देश का सलाम जग ।
योगदान तेरा कभी भूल नही पायेगा ।

मिसाइल मेन तूने दिया विज्ञान उसे
युवाओं का मन नित हर पल भुनायेगा ।

सादगी बनी थी पर्याय अखिल विश्व में
सोन चिरैया के पंख कौन सहलायेगा ।

बात गर होगी विश्व गुरु की पटल पे तो
जग सारा भारती के आगे झुक जायेगा ।

अनिल उपहार

Saturday, July 23, 2016

मुक्तक(बेटी)

ज़िन्दगी की महकती एक गंध है बेटी ।

कमनीयता का सलोना सा छंद है बेटी ।

त्याग और बलिदान के इतिहास में

सेवा समर्पण से जुड़ा अनुबंध है बेटी ।

अनिल उपहार

Friday, July 22, 2016

तेरी रहमत की बारिश (मुक्तक)

तेरी रहमत की बारिश से घर मेरा समंदर है मौला ।

पंख दिये है उम्मीदों के मन मस्त कलंदर है मौला ।

जो भी मिला अपनी किस्मत का ये कर्मो की माया है

फिर कैसे  फरियाद करें जब वक़्त सिकंदर है मौला।

---------अनिल उपहार ----------

Monday, July 18, 2016

मुक्तक(मन हुआ)

मन हुआ छोटा बहुत पर कामना मरती नही ।

तन भले ही साथ ना दे वासना मरती नहीं ।

सांस जब अपनी नही  किस बात का गुमान फिर

धन बहुत है पास लेकिन लालसा मरती नहीं ।

अनिल उपहार

Friday, July 15, 2016

दोहे

अम्बर भी धोने लगा चरण धरा के आज ।

पावस का ख़त पढ़ चला खोल पपीहा साज ।

नित परिधान बदल रहा देखो बादल आज ।

बून्द बून्द ने छेड़ दिए मन के सारे साज ।

अनिल उपहार

Thursday, July 14, 2016

ओ शिल्पी (कविता)

ओ शिल्पी
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कोई नन्हा सा किरदार था
वो रिश्तों के रंगमंच का ।
जीवन के सुख दुःख
देखे थे बहुत करीब से उसने ।
एक शिल्पी सा तराशना चाहता था वो
अनछुए पहलुओं कों ।
बनाना चाहता था
पत्थर को भी भगवान ।
उसकी बातों में था
अज़ीब सा सम्मोहन
सादगी और लावण्य का
पर्याय थी उसकी विनम्रता ।
अचानक आई वक़्त की
तेज आंधी ने
नफरत की ऐसी दिवार खड़ी करदी
जिसने सारे तिलिस्म कों
झकझोर कर रख दिया ।
किसी और दुनियां से आया
वो किरदार
गुमनाम बस्ती में कहीं खो गया
शायद फिर से लौट आए वो शिल्पी
और तराश जाये पत्थर को
भगवान की तरह ............,

अनिल उपहार

Tuesday, July 12, 2016

कविता(दम्भ)

दम्भ जब अपनी हद से
लगता है गुजरने
वो नही देखता
ऊँच नीच
अपना पराया ।
वो तो बस चाहता है
हरदम
मर्यादा की दहलीज़ को लांघना
और कर देना चाहता है साबित
अपनी झूटी दलीलों से
खुद का ही हलफनामा ।

टांग कर
सच्चाई को सलीब पर ।

अनिल उपहार

Sunday, July 10, 2016

मुक्तक (आज फिर से)

आज फिर से दुआओ में असर आया है ।

चाँद फिरसे मेरे आँगन में उतर आया है ।

पढ़ तो लेता मैं उसे शोख़ निगाहों से मगर

अक्स जैसे कोई आँखों में उभर आया है ।

अनिल उपहार

Saturday, July 9, 2016

मुक्तक लगी दिल की

लगी अपने दिल की बुझाने  चला हूँ ।

तुम्हें हाले दिल मैं सुनाने चला हूँ ।

जुदाई के लम्हे वो फुरकत की रातें

तुम्हे दिल के किस्से सुनाने चला हूँ।

अनिल उपहार

Friday, July 8, 2016

मुक्तक हादसों से

हादसों से ही सदा मैं तो पला हूँ ।

राह में अक्सर अकेला ही चला हूँ

ठोकरे खाई बहुत अपनों के हाथो

तुम्हे दिल के किस्से सुनाने चला हूँ।

अनिल उपहार

Thursday, July 7, 2016

मुक्तक

दर्द तो  जाता रहा अब ना रहा कोई गिला ।

अश्क आँखों ने पिये थे जख़्म भी खुद ही सिला ।

वक़्त की आंधी में फिर भी दीप सा लड़ता रहा

आपके इस प्यार से ही हौंसला हमको मिला ।

अनिल उपहार

Wednesday, July 6, 2016

मुबारकबाद

ईद की हार्दिक शुभ कामनाये ।

भुलादो सब गिले शिकवे मुबारक ईद हो तुमको ।

रहे ना फासला दरम्यां मुबारक ईद हो तुमको ।

सिवइयों की तरह घुल जाये ज़हनों में हमारे भी

ज़ुबाँ पर बस घुले मिश्री मुबारक ईद हो तुमको ।

अनिल उपहार

मुक्तक

मिले थे ज़ख्म उल्फत में कहानी याद आती है ।

पली बरसों से आँखों में रवानी याद आती है ।

तुम्हारी इक छुअन से होगई थी देह वृन्दावन

तुम्हारे प्यार की पहली निशानी याद आती है ।

अनिल उपहार

Tuesday, July 5, 2016

मुक्तक

सब दलीले व्यर्थ थी बस फैसला बाकी रहा ।

कटघरे में खुद खड़ा था हौसला बाकी रहा ।

मज़हबी उन्माद में उलझा रहा वो इस कदर

बस हमेशा दो कदम का फासला बाकी रहा ।

अनिल उपहार

Monday, July 4, 2016

बेबसी(कविता)

दरख़्तों पर पड़ी

बारिश की पहली बून्द ने

नन्ही कोंपल के बदन पर

सुरमई हस्ताक्षर क्या किये

उसका पोर पोर

किलकारियों से गूंजने लगा ।

ठीक उसी तरह

तुम्हारी देह के किसी कोने में

मेरी आहट पा ख़ुशी से सराबोर

होगई थी तुम

लेकिन मेरा होना

तुम्हारी इच्छाओ को लील गया

और मेरे जनक की रूढ़िवादी

विचार धारा ने तुम्हारी ममता को

तार तार कर दिया ।

छोड़ आई तुम मुझे अपनी ममता से

दूर

और कर दिया

शांत खामोश सदा के लिए ।।।।।।।

अनिल उपहार