वतन परस्ती ही जिनके लिए जवानी थी ।
हरेक साँस देश भक्ति की निशानी थी ।
तन्हां छोड़ चले थे जो उम्मीदों का चमन
नमन है शूरवीरों को अमिट जिनकी कहानी थी ।
अनिल उपहार
हरेक साँस देश भक्ति की निशानी थी ।
तन्हां छोड़ चले थे जो उम्मीदों का चमन
नमन है शूरवीरों को अमिट जिनकी कहानी थी ।
अनिल उपहार






