Tuesday, March 29, 2016

मुक्तक

तुम्हारे प्यार की कश्ती में सागर पार कर जाते ।

इशारा हो अगर तेरा तो हम पतवार बन जाते ।

तुम्हारी इक छुअन से होगयी है देह वृन्दावन

अगर होजाती तुम राधा तो हम घनश्याम बन जाते

अनिल उपहार

Monday, March 28, 2016

खूब जमा कैथून कवि सम्मलेन। 

Friday, March 18, 2016

मुक्तक

: तेरे हरेक फरेब पर अफसाना लिख दिया ।

 जो ज़ख्म खाये तुमसे तो दीवाना लिख दिया ।

 कैसा अज़ब दस्तूर है जालिम इस जहाँ का

 रिश्तों की भीड़ में मुझे बेगाना लिख दिया । -


------अनिल उपहार

मुक्तक

: तेरे हरेक फरेब पर अफसाना लिख दिया ।

 जो ज़ख्म खाये तुमसे तो दीवाना लिख दिया ।

 कैसा अज़ब दस्तूर है जालिम इस जहाँ का

 रिश्तों की भीड़ में मुझे बेगाना लिख दिया । -


------अनिल उपहार