Thursday, September 30, 2021

मुक्तक(सिर्फ तुम)

जब जब मैं लिखने बैठू, तुम आकर लिखवा जाते हो।

मेरे मौन स्वरों को अपने मीठे स्वर दे जाते हो ।

गीत तुम्हारे शब्द तुम्हारे मैं तो वाचक अदना सा,

कौन हो तुम हर वक़्त हृदय की सारी पीड़ा हर जाते हो।

डॉ अनिल जैन उपहार

Monday, September 13, 2021

हिंदी दिवस पर(मुक्तक)

हिंदी दिवस की शुभकामनाए।

अभिव्यक्ति का शिखर कलश है, भावों की  वन्दनवार है हिंदी।
भारत के भाल का चंदन, नेह भरा उपहार है हिंदी।
अलंकार सुशोभित जिससे राष्ट्र का स्वाभिमान है हिंदी
संस्कृति की उन्नायक है, भाषा का तोरण द्वार है हिंदी।

डॉ अनिल जैन उपहार

Tuesday, September 7, 2021

मुक्तक(तुमसे ही पाया है ।)

ज़हन में हर घड़ी मेरे ,तेरी यादों का साया है ।
मगर तू है नही मेरा,नहीं लगता पराया है ।
किसी की आंख का आँसू चुरा पलकों पे रख लेना,
मुहोब्बत का यही लहज़ा तो मैने तुमसे पाया है ।

डॉ अनिल जैन उपहार#कॉपीराइट