काव्यांजलि
Tuesday, June 15, 2021
मुक्तक(श्रंगार)
कभी मिलने ओ मिलाने की ही सूरत लिखना ।
लौट के आओगे इक दिन वो मुहूरत लिखना ।
पढ़ सकूं ख़त कि वो बातेँ जो मिटा दी तुमने।
गर लिखो अबके तो बस ऐसी इबारत लिखना ।
--------डॉ अनिल जैन उपहार कॉपीराइट --------
Saturday, June 5, 2021
मुक्तक(विश्व पर्यावरण दिवस)
विश्व पर्यावरण दिवस पर
खूब दिया हमने न सहेजा सांसे तक लाचार दिखी।
प्रकृति की अन देखी की तो सांसे खुद बाज़ार बिकी।
जंगल सारे काट दिये जब भौतिक सुख की आशा में
छोटे से एक कीट ने आकर इंसानी औकात लिखी।
डॉ अनिल जैन उपहार
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