Wednesday, September 25, 2024
मुक्तक(कालिमा नयन की)
जब नयन की कालिमा पर गीत कोई ढल उठे।
गेसुओ की स्निग्धता पर छंद मंडित हो उठे।
उस मिलन को आखरी अनुबंध में अपने पिरोना।
तृप्ति से कुछ पल चुरा कर अश्रु जल से फिर भिगोना।
डा अनिल जैन उपहार
@highlight
Wednesday, September 18, 2024
मुक्तक(बसर कर दो)
जहाँ बरसों था विराना वहाँ आकर बसर करदो ।
मेरे गीतों को स्वर देकर प्रेम के रस से तर करदो ।
मिलेंगे सैकड़ो किस्से यहाँ पर हीर रांझा के ,
ह्रदय के पट ज़रा खोलो मुहोब्बत कों अमर करदो ।
डा अनिल उपहार -------
09413666511
Thursday, September 12, 2024
हिंदी दिवस पर
उपमाओं ने गूंथा इसको बिंबों ने खूब संवारा।
कभी अलंकृत हुई धरा पर गीतों ने खूब निखारा।
पंथ निराला की बेटी बन तुलसी का मान बढ़ाया।
दिनकर के आंगन की शोभा भावों ने थाल सजाया।
माथे की बिंदी सी शोभित ये हिंदी कहलाती है।
मां की लोरी की मधुर तान सुन बचपन को दुलराती है ।
डा अनिल उपहार
Wednesday, September 4, 2024
छंद गीतों ने उतारे(मुक्तक)
मन देहरी पर बस निशा हो आगमन के ही तुम्हारे।
भोर की उजली किरण फिर बांचती हो खत हमारे।
द्वार पर जलता दिया रख आस ने कुछ यूं कहां,
तृप्ति ने अनुबंध लिख कुछ छंद गीतों के उतारे।
डा अनिल जैन उपहार
Monday, September 2, 2024
प्रीत का दामन(मुक्तक)
दसों दिशाएं अभिभूत हो दुलराती है नेह का आंगन।
जाने किसने लिखी भूमिका आंखों में आ उतरा सावन।
पूर्वाग्रह की तेज हवाएं आंखों में नश्तर सी चुभती,
कौन भंवर में उलझ गए तुम छोड़ गए वो प्रीत का दामन।
डा अनिल जैन उपहार
मन का पपिहा(मुक्तक)
अश्रु कण ने बोए होगे जब कुछ नवल गीत वसुधा पर।
अपरिभाषित उपमाओं ने गूंथी होगी वंदनवारें।
प्रार्थनाएं मौन खड़ी बन याचक जैसे पंथ बुहारे,
आगत के स्वागत में व्याकुल मन का पपिहा बाट निहारे।
डा अनिल जैन उपहार
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