रूप की धूप कहें या भीगे हुए जज़्बात कहें । सूरज से नज़र मिलाती हँसी मुलाकात कहें । गहनता है संस्कारों की अधरों से बयाँ होती है रुबाई मीर की कहदें या खुदा की करामात कहें । अनिल उपहार
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