Monday, April 24, 2017

मुक्तक (शहीद)

लहू से सींचकर जो चल दिये पहचान लिख देना ।

वो पहली रात सूनी सेज का अरमान लिख देना

मुनिया राह तकते सो गयी आये नही पापा

जिसका छिन गया बचपन खोई मुस्कान लिख देना ।

अनिल जैन उपहार

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