Saturday, August 12, 2017

मुक्तक

तू ही किरदार रहा है मेरे फसाने का ।

तू ही अंदाज़े बयां है मेरे तराने का ।

मेरे अधरों पे जो मचले वो गीत भी तू है

तुझसे सीखा है हुनर मैंने गुनगुनाने का ।

अनिल जैन उपहार

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