तू ही किरदार रहा है मेरे फसाने का ।
तू ही अंदाज़े बयां है मेरे तराने का ।
मेरे अधरों पे जो मचले वो गीत भी तू है
तुझसे सीखा है हुनर मैंने गुनगुनाने का ।
अनिल जैन उपहार
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