Thursday, July 19, 2018

अलसायी सुबह(कविता)

स्मृति के खंडबिम्ब
और कौंधते शब्द
नित देते
मेरी सर्जना को
संदर्भ ।
ठीक उसी तरह
सावन की पहली बून्द ने
लिख दिया था
मिलन के पृष्ठ पर
अलसायी सुबह का सच ।
गवाह है वो हस्ताक्षर
जो आज भी दर्ज़ है
सुनहरी यादों के दस्तावेज पर ।

अनिल उपहार

No comments:

Post a Comment