शिक्षक दिवस की बधाई।
मैं नन्हा सा दीपक हूँ और तुम सूरज की ज्योति हो ।
मैं अदना सा अल्हड़ जुगनू तुम उजले मन के मोती हो।
तुम से ही सीखी है मैंने कलम कविता की भाषा,
तुम से ही जानी है मैंने महाकाव्य की परिभाषा।
देख तुम्हारे कदमों को मैंने भी चलना सीख लिया,
शब्द शिल्प की भाषा को मैंने भी पढ़ना सीख लिया।
सीख लिया टूटे शब्दों से माला के मोती जड़ना ,
शब्द ब्रम्ह है शब्द शाश्वत साहित्य सृजन में नित बढ़ना।
साहित्य सूर्य की ज्योति तुम हर छंद में अर्पित करता हूँ।
श्रद्धा के स्वर्णिम पुष्प तुम्हें लो आज समर्पित करता हूँ।
डॉ अनिल जैन उपहार #कॉपी राइट
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