Tuesday, June 15, 2021

मुक्तक(श्रंगार)

कभी मिलने ओ मिलाने की ही सूरत लिखना ।

लौट के आओगे इक दिन वो मुहूरत लिखना ।

 पढ़ सकूं ख़त कि वो बातेँ जो मिटा दी तुमने।

गर लिखो अबके तो बस  ऐसी  इबारत लिखना ।

--------डॉ अनिल जैन उपहार कॉपीराइट --------

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