काव्यांजलि
Saturday, July 24, 2021
लहज़ा (कविता)
ये जो तुम्हारे सख्त लहज़े की
तहरीर है न
बड़ा नर्म अहसास
कराती है
पथराई आंखों को ।
शायद इन्ही में गुम तो
नहीं
हौसलो के पर
जो खींच लाये है
तुम्हे धरती से
आसमा पर ।
अनिल जैन उपहार
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