Friday, February 24, 2023

फागुन की मस्ती(मुक्तक)

मौसम पर छाने लगी अब फागुन की गंध।

कलियों ने भी लाज के तोड़ दिए तटबंध ।

 फागुन बन आना प्रिये ओ मेरे मनमीत।

मादकता लिखने लगी अधरों पर नवगीत।

-------अनिल उपहार----

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