काव्यांजलि
Tuesday, August 13, 2024
मुक्तक(किरदार)
तू ही किरदार रहा है मेरे फसाने का ।
तू ही अंदाज़े बयां है मेरे तराने का ।
मेरे अधरों पे जो मचले वो गीत भी तू है
तुझसे सीखा है हुनर मैंने गुनगुनाने का ।
डा अनिल जैन उपहार
anil uphar
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment